गुलज़ार साब की ये नज्म उन्हीं की आवाज में.
Saturday, 27 October 2007
Wednesday, 10 October 2007
बरसन लागी सावन बुंदिया राजा
बहोत साल पहले ये दादरा गुलाम अलीजी की आवाज में सुना था. बादमें कई अंग्रेजी, हिंदी और मराठी गानोंकी भीड में कही खो गया था. परसों विश्वजालापर घुमते घुमते अचानक इस गाने की याद आई. भारतीय गानों के सभी विख्यात स्थल छान मारे, लेकीन इसका कोई पता नही था. बहोत देर घूमने के बाद एक जगह मिल ही गया. उसे फिर सुनते हुए ऐसा लगा जैसे किसी करीबी दोस्त को बरसों बाद मिल रहा हूं.
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