बाबा बुल्लेशाहजी की ये रचना नुसरत फतेह अली खान के आवाज में सुनी. रचना पंजाबी में होने के कारण कुछ शब्दों का अर्थ समझ नही पाया. सूफी रचनाओं की विशेषता ये है की ये परमेश्वर और प्रियजन दोनों को लागू होती है. इस रचना में ऐसा लगता है की कुछ पंक्तियां परमेश्वर के लिये और कुछ प्रियतम के लिये है. जैसे की, आजा वास्ता खुदा दा नई ते एजी मै चल्ली ये पंक्ती खुदा के लिये होना थोडा अजीब सा लगता है. दूसरी तरफ रचना की शुरूवात में सभी पंक्तियां मुक्ती कैसे मिलेगी इस बात पर है. जाहिर है ये खुदा के लिये है.
गफलत ना कर यार परी तू
छडे जंगली रैन बसेरा
पंछी मुड घरानूं आ गए
ते क्यों चित नई करदा तेरा
वल वल इष्क मरें दा हल्ले
हत्ते मै तेरी तू मेरा
यार फरीद करा जिंद कुर्बानी
जे यार पावे इक फेरा
मक्के गयां गल मुकदी नाही
पवें सौ सौ जुंम्मे पढ आइए
गंगा गया गल मुकदी नाही
पवें सौ सौ गोते खाइए
गया गया गल मुकदी नाही
पवें सौ सौ पंड पढ आइए
बुल्ले शा गल पाइयां मुकदी
जे दो मैनु दिलों गवाइए
इष्क दा चरखा, दुखादियां पूंडीयां
ज्यूं ज्यू कत्ती जावां होड पैयां दूडीयां
मेरा ये चरखा नौ लखा कुडे
यूं कतदी कतदी पका कुडे
हर चरखे दे बेडे मै तेनू याद करदी
तेरे बांजों दिल दिया मेहेरमां वे
साड्डा ज्यूंना तेडे चजदा एं
मेरे लूं लूं विच, मेरी नस नस विच
तेरी यांदा तूंकां मजदाई
हूण औण दवेला आ सजना
यूं छड दे बेपरवाहीनूं
पूच्छे मेरी नगाह हूण तेरा पता
हर औंदे जांदे राही नूं
वज्जा तीरही जल्दा लोगी कैंदे मेनू केल्ली
आजा वास्ता खुदादा नई ते एजी मै चल्ली
जग मारदा है ताने दस किथ्थे तेरा माही
तेनू छड गया कल्ली किथ्थे हो गया रही
देवा की मै जवाब रोमा कल्लम कल्ली
चरखा मेरा रंग रंगीला
बण के तेरी याद बसीला
तू अंखियां दो दिल दे बेडे
मै तेनू याद कर दी
मुकदी नाही गम दी पूरी
ज्यूं ज्यूं कत्ता हो गया दूणी
मेरे दुखडे कौन न बेडे
मै तेनू याद कर दी
मै ते मंगरा जडदी होइयां
मेरा बागल करदा पका कुडे
लोकमाणे चाक महीना
मेरे भागा पका कुडे
लोक माणे इष्क सुखाला
इष्क न छडदा पका कुडे
बुल्ले शा ने सच कर जांदा
शाह अनागपुर पका कुडे
मेरा ये चरखा नौ लखा कुडॅ
Friday, 29 June 2007
Wednesday, 27 June 2007
ये चिठ्ठा नोरा के लिये
हम भारत से जर्मनी सकुशल पहुंच गये है. हमे आशा है की ये फोटॉ आपतक पहुंच जायेगा. अजय गेस्ट हाउस के सभी कर्मचारीयों को हमारी तरफ से शुभकामनाएं. आप को और आप के परिवार को हमारी तरफ से बहोत सारी शुभकामनाएं. हम आशा करते है के भविष्य आप के लिए आनंदमय और मंगलकारी हो.
Monday, 18 June 2007
ताजमहल
जब ताजमहल पूरा हुआ
बादशाह शाहजहान ने उसे
उपर से देखा
नीचे से देखा
बाऍ से देखा
दाऍ से देखा
आगे से देखा
पीछे से देखा
फिर बोला
साला, मजाक मजाक में खर्चा बहुत हो गया
बादशाह शाहजहान ने उसे
उपर से देखा
नीचे से देखा
बाऍ से देखा
दाऍ से देखा
आगे से देखा
पीछे से देखा
फिर बोला
साला, मजाक मजाक में खर्चा बहुत हो गया
Monday, 4 June 2007
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