आते है गैब से ये मजामिन खयाल में, गालिब सरीर-ए-खामा नवा-ए-सरोश है
इतनी मायूसियों के बाद भीतमन्ना दिल से नही जातीमसला है गुलाब, तो क्याखुशबू नही जाती
waah waah!!
thanks, mate!
वाह..
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3 comments:
waah waah!!
thanks, mate!
वाह..
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