बेनाम
आते है गैब से ये मजामिन खयाल में, गालिब सरीर-ए-खामा नवा-ए-सरोश है
Monday, 18 June 2007
ताजमहल
जब ताजमहल पूरा हुआ
बादशाह शाहजहान ने उसे
उपर से देखा
नीचे से देखा
बाऍ से देखा
दाऍ से देखा
आगे से देखा
पीछे से देखा
फिर बोला
साला, मजाक मजाक में खर्चा बहुत हो गया
1 comments:
shabnam
said...
superb
22 August 2008 23:04
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superb
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