बेनाम
आते है गैब से ये मजामिन खयाल में, गालिब सरीर-ए-खामा नवा-ए-सरोश है
Monday, 4 June 2007
कबीर
अचारी सब जग मिला
मिला बिचारी न कोय
कोटि अचारी वारिये
एक बिचारी जो होय
0 comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
About Me
Raj
Random musings of an Indian in India
View my complete profile
Blog Archive
►
2009
(1)
►
October
(1)
पाथेर पांचाली
►
2008
(7)
►
November
(1)
बस के दुश्वार है...
►
March
(3)
गोगली
तनहाई
एक बेकारसा दिन
►
February
(1)
साया
►
January
(2)
फुरसत
पहेली
▼
2007
(15)
►
December
(3)
खुशबू
शौक़ हर रंग
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
►
November
(2)
भारत एक खोज
नींद
►
October
(3)
मकान की उपरी मंझिल पे अब...
बरसन लागी सावन बुंदिया राजा
खुसरो
►
July
(2)
मिर्ज़ाजी
कहना उसे
▼
June
(4)
बाबा बुल्ले शाह
ये चिठ्ठा नोरा के लिये
ताजमहल
कबीर
►
March
(1)
तनहा
FEEDJIT Live Traffic Feed
Feedjit Live Website Statistics
shauq har rang.mp3
0 comments:
Post a Comment