इन दिनों घर बदलने के चक्कर में हूं. पुरानी चीजों के ढेर में मिली कॉलेज के जमाने की डायरी. उस समय गालिब, गुलजार जैसी हस्तियों का दीवानापन सर पे संवार था. (वो अब भी बरकरार है और मरते दम तक रहेगा)
उसी डायरी में मिली एक 'ब्लू मूड' में लिखी हुई गझल.
तनहा सी एक शाम दिल में उतरती रही
एक धुंदली सी याद दिल को सताती रही
जिंदगी से कितनी ही बार मायूस हो गए
सूखी शाख पर कोंपले बारहा आती रही
सूकून नही मिला मंझिलें पाने के बाद
हर मंझिल दिल को और तनहा बनाती रही
जिंदगी तो कब की खत्म कर दी होती
हर बार रुह मेरी बनकर मसीहा आती रही
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


7 comments:
aai shappatha hindi sudha!! .. sahi re !
वहवा क्या बात है
तनहा के नाम
तनहा तेरे मातममे नही रहता ये सामसिहपोश
मै हु दिल है, तनहाई है, तुमभी होती अच्छा होता.
मौजे गमसे कोई ना हो मायुस जिंदगी डुबकर उभरती है
कैदेहयात बंदेगम अस्ल मे दोनो एक है
मोतसे पहले आदमी गमसे नीजाद पाये क्यो ॥
दिलही तो है ना संगोखीस्त दर्द् से भर ना आये क्यो
रोयेगें हम हजार बार कोई हमे सताये क्यो ।
pujari saheb, dhanyavad.
ijjataafajai ke liye bahot bahot shukriya, harekrishnaji
Ghalib mera bhi pasaNdida shayar hai.
Bahut khoob!
and now what is the difference between shukriya and dhanyavad? ;)
Nora, you amaze me. are you planning to master Hindi in addition to the many languages you speak? :)
dhanyavaada and shukriyaa both mean the same thing. dhanyavaada if Hindi and shukriya is Urdu. A lot of Urdu words are used in Hindi.
theking,
bahot bahot shukriya!
Post a Comment